- सीएम गहलोत का प्रयास कि राजस्थान से कोई गलत संदेश नहीं जाए।
- प्रभारी महासचिव अजय माकन का जयुपर में दरबार शुरू।
- पायलट गुट के हेमा राम चौधरी से माकन ने अकेले में मुलाकात की।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – इसे दिल्ली में गांधी परिवार के नेतृत्व को लेकर घमासान का असर ही कहा जाएगा कि 30 अगस्त की रात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सरकारी आवास पर जो डिनर रखा, उसमें पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी उपस्थित रहे। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को भी खास तौर से आमंत्रित किया गया। यह डिनर प्रदेश महासचिव अजय माकन के सम्मान में रखा गया। माकन उस तीन सदस्यीय कमेटी के सदस्य भी हैं जो सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के मतभेदों को भी समाप्त करवाएगी। कमेटी का गठन कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया है। गहलोत और पायलट के बीच मतभेदों को समाप्त करवाने के लिए अजय माकन 30 अगस्त को जयपुर आ भी गए हैं, लेकिन अब सीएम गहलोत नहीं चाहते कि राजस्थान में मतभेद की कोई बात सामने आए। अजय माकन को भी आगाह किया गया है कि वे ऐसा कोई व्यवहार नहीं करे, जिससे लगे कि मतभेदों को दूर करवाने आए हैं। यही वजह रही कि सीएम ने अपने डिनर में पायलट को भी आमंत्रित किया। इतना ही नहीं कि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष के नाते पायलट का फोटो भी प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में लगा दिया गया है। गांधी परिवार के लिए यह संतोष की बात है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों गांधी परिवार के साथ हैं। दोनों नेता चाहते हैं कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस का नेतृत्व करें। हालांकि अजय माकन ने 31 अगस्त से जयपुर में अपना दरबार शुरू कर दिया है। 31 अगस्त को माकन ने पूर्व प्रदेशाध्यक्षों, पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों आदि से मुलाकात की। एक सितम्बर को जयुपर संभाग के जन प्रतिनिधियों एवं कांग्रेस के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करने का प्रोग्राम है। विगत दिनों पायलट जब अपने 18 विधायकों के साथ एक माह के लिए दिल्ली चले गए थे, तब पायलट ने कहा था कि अशोक गहलोत की सरकार ने चुनावी वायदे पूरे नहीं किए हैं। लेकिन दिल्ली में मचे घमासान के मद्देनजर पायलट भी अब चुप हैं। पायलट भी ऐसा कोई बयान नहीं दे रहे हैं,जिससे प्रदेश में विवाद की स्थिति नजर आती हो। पायलट के जो समर्थक अजय माकन के दौरे से उम्मीद लगाए बैठे थे उन्हें फिलहाल निराश होना पड़ेेगा। सब जानते हैं कि कांग्रेस के 23 दिग्गज नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संगठन के कामकाज पर नाराजगी जताई है। अब गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेतो रोजाना गांधी परिवार के नेतृत्व पर हमला कर रहे हैं। आजाद का तो कहना है कि यदि संगठन में चुनाव नहीं करवाए गए तो कांग्रेस को 50 साल तक विपक्ष में ही बैठना पड़ेगा। सिब्बल का कहना है कि अब कांग्रेस को सातों दिन 24 घंटे काम करने वाला अध्यक्ष चाहिए। यानि कांग्रेस के अनेक नेता नहीं चाहते हैं कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी को फिर से कांगे्रस का अध्यक्ष बना दिया जाए। दिल्ली में अब गांधी परिवार के नेतृत्व को खुलेआम चुनौती मिल रही है। ऐसे में राजस्थान का घटनाक्रम कांग्रेस के लिए बहुत मायने रखता है। यह बात अलग है कि फिलहाल अशोक गहलोत राजस्थान छोड़कर दिल्ली में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं।
हेमा राम से अकेले में मुलाकात:
31 अगस्त को प्रदेश कार्यालय में प्रभारी महासचिव अजय माकन को सचिन पायलट गुट के विधायक हेमा राम चौधरी से अकेले में मुलाकात करनी पड़ी। असल में जब माकन वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। तब कक्ष में सीएम अशोक गहलोत गुट के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल आदि भी मौजूद रहे। कांग्रेस का कौन नेता क्या कह रहा है, इस पर डोटासरा और विवेक बंसल की नजर लगी हुई थी। इस स्थिति को देखते हुए हेमा राम चौधरी ने स्पष्ट कहा कि वे अकेले में अपनी बात माकन को बताएंगे। इस पर माकन ने डोटासरा विवेक बंसल आदि से आग्रह किया कि वे कुछ समय के लिए दूसरे कक्ष में चले जाए। डोटासरा आदि के चले जाने के बाद ही हेमा राम चौधरी ने अजय माकन को अपने मन की बात बताई। यहां यह उल्लेखनीय है कि पायलट जिन 18 विधायकों को दिल्ली ले गए थे, उनमें हेमा राम चौधरी भी शामिल थे। सीएम अशोक गहलोत ने पायलट पर भाजपा के साथ मिली भगत का आरोप लगाया तो हेमा राम चौधरी ने ही खंडन किया था। चौधरी शुरू से ही गहलोत की कार्यशैली को लेकर नाराज बताए गए।







