सरकार और संगठन का फीडबैक लेने के लिए प्रभारी महासचिव अजय माकन कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ छोटी कुर्सी पर बैठे ऐसे माहौल से फीडबैक का अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • आखिर अजय माकन के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
  • प्रणब मुखर्जी के निधन के कारण संभाग स्तरीय फीडबैक का कार्यक्रम टला।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – माना तो यही गया था कि कांग्रेस के असंतुष्ट नेता सचिन पायलट की शिकायत पर अविनाश पांडे को राजस्थान से हटाकर अजय माकन को प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया गया और अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निर्देश पर अजय माकन प्रदेश का दौरा कर सरकार और संगठन का फीडबैक ले रहे हैं। फीडबैक के आधार पर माकन जो रिपोर्ट देंगे, उससे अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार का भविष्य तय होगा। यानि मौजूदा दौर में अजय माकन राजस्थान में सबसे बडे और महत्वपूर्ण नेता हैं, लेकिन 31 अगस्त को जयपुर में जिस तरह माकन ने फीडबैक लिया, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। फीडबैक पर पूरी तरह सीएम गहलोत का प्रभाव नजर आया। फीडबैक के लिए जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के कक्ष में व्यवस्था की गई। कक्ष में अध्यक्ष की मुख्य और बड़ी कुर्सी पर डोटासरा बैठ गए, जबकि माकन के लिए डोटासरा के निकट एक छोटी कुर्सी लगाई गई। यानि जो अजय माकन सरकार और संगठन की रिपोर्ट तैयार करेंगे वो तो छोटी कुर्सी पर बैठे और जिसकी रिपोर्ट तैयार की जानी है वह बड़ी कुर्सी पर। इससे फीडबैक के माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है। अपने कक्ष में डोटासरा के बड़ी कुर्सी पर बैठे होने और माकन के छोटी कुर्सी पर बैठने से उपस्थित नेता की मानसिक स्थिति का भी अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसा माहौल बनाया गया कि डोटासरा की निगरानी में ही अजय माकन बैठे हुए हैं। ऐसी स्थिति को देखकर ही विधायक परसराम मोरदिया ने कहा कि डोटासरा की मौजूदगी की वजह से वे अपने मन की बात माकन को नहीं बता सके। जबकि विधायक हेमाराम चौधरी, दीपेन्द्र सिंह शेखावत, सुभाष महरिया आदि ने तो डोटासरा की उपस्थित में माकन से मिलने से ही इंकार कर दिया। बाद में डोटासरा को अपने ही कक्ष से बाहर जाना पड़ा। सवाल उठता है कि प्रदेश मुख्यालय में माकन के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। क्यों माकन को डोटासरा के कक्ष में बैठाया गया? सवाल यह भी है कि क्या प्रभारी महासचिव का पद प्रदेशाध्यक्ष से छोटा होता है? आखिर प्रभारी महासचिव को प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर क्यों नहीं बैठाया गया? सब जानते हैं कि सचिन पायलट को हटाकर डोटासरा को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। दिल्ली से लौटने के बाद पायलट ने कहा था कि हमने अपना मर्ज डॉक्टर को बता दिया है और हमें पूरा भरोसा है कि मर्ज का इलाज हो जाएगा। सवाल उठता है कि क्या पायलट के मर्ज का इलाज ऐसे होगा? प्रभारी महासचिव बनने के बाद से ही माकन सीएम गहलोत की प्रशंसा कर रहे हैं। 31 अगस्त को भी माकन ने कहा कि अब राजस्थान में सत्ता और संगठन में कोई विवाद नहीं है। गहलोत के नेतृत्व में सरकार बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जो वायदे किए गहलोत सरकार ने 70 प्रतिशत वायदे पूरे कर दिए हैं। शेष 30 प्रतिशत वायदे भी पूरे हो जाएंगे। जकि सचिन पायलट लगातार कहते रहे हैं कि गहलोत सरकार ने वायदे पूरे नहीं किए हैं।
फीडबैक टला:
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से अजय माकन का संभाग स्तरीय फीडबैक कार्यक्रम टल गया है। जयपुर संभाग के विधायकों एवं अन्य पदाधिकारियों से माकन को एक सितम्बर को मुलाकात करनी थी। लेकिन अब यह मुलाकात 8 सितम्बर को होगी। इसी प्रकार अजय माकन 2 सितम्बर के बजाए 9 सितम्बर को अजमेर आएंगे। अजमेर दौरे की सारी कमान सीएम अशोक गहलोत समर्थकों के पास है। यही वजह है कि माकन के फीडबैक के लिए पांच सितारा सुविधा युक्त होटल मेरवाड़ा बुक की गई है। इसी होटल में दोपहर का लंच भी होगा।

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