राजस्थान में तो बिना बहस के आधे दिन में ही 13 बिल पास करवाने का रिकॉर्ड बना है।

  • प्रश्नकाल और शून्यकाल तो राजस्थान विधानसभा में भी नहीं हुआ।
  • तो फिर लोकसभा में प्रश्नकाल नहीं होने पर कांग्रेस को ऐतराज क्यों?
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला तो राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी का ही अनुसरण कर रहे हैं।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – लोकसभा और राज्यसभा का मानसून सत्र 14 सितम्बर से शुरू हो रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए आधे दिन राज्यसभा और आधे दिन लोकसभा चलाने का निर्णय लिया गया है। ताकि लोकसभा और राज्यसभा के सांसद एक साथ संसद भवन में नहीं आए तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह 9 बजे से दोपहर एक बजे तक राज्यसभा तथा दोपहर 3 बजे से सायं 7 बजे तक लोकसभा का संचालन होगा। इस बार शनिवार और रविवार को भी दोनों सदन संचालित होंगे। कम समय को ध्यान में रखते हुए दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं करवाने का निर्णय लिया गया है। शून्यकाल को करवाने के लिए विचार विमर्श हो रहा है। प्रश्न और शून्य काल में दो घंटे लगते हैं। हालांकि ये दो घंटे महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन समय की कमी लम्बित विधायी कार्यों को देखते हुए दो घंटे की बचत की जा रही है। लेकिन अब लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी, सांसद शशि थरूर आदि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रश्नकाल रद्द कर सांसदों के अधिकारों का हनन हो रहा है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार संसद से भागने की कोशिश कर रही है। मोदी सरकार सांसदों के सवालों से बचना चाहती है। इसलिए सवाल पूछने का अधिकार भी छीना जा रहा है। हालांकि यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति का है, लेकिन कांग्रेस इसके लिए सीधे तौर पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस नेताओ के आरोप कोई भी हो सकते हैं, लेकिन कांग्रेस को यह भी समझना चाहिए कि ऐसे कामों की शुरुआत किसने की है? राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। राजस्थान विधानसभा का सत्र हाल ही में 14 से 27 अगस्त तक हुआ। कोरोना संक्रमण की वजह से राजस्थान विधानसभा में भी प्रश्नकाल के साथ साथ शून्यकाल भी को रद्द किया गया, तब किसी भी कांग्रेस नेता ने ऐतराज नहीं किया। स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के इस फैसले का स्वागत किया। विधानसभा में जब कुछ विधायकों ने प्रश्नकाल और शून्यकाल को नहीं करवाने पर ऐतराज जताया तो विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने दो टूक कहा कि अध्यक्ष के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं की जा सकती है। सब जानते हैं कि जोशी सख्त मिजाज के विधानसभा अध्यक्ष हैं। कई बार वे सरकार के मंत्रियों को भी डांट देते हैं। लोकसभा में प्रश्नकाल नहीं होने पर आज कांग्रेस के नेता भले ही ऐतराज करें, लेकिन 14 अगस्त वाले राजस्थान विधानसभा के सत्र में अंतिम दिन आधे दिन में 13 बिल पास करवाने का रिकॉर्ड भी बन चुका है। यह रिकॉर्ड तब बना जब विधानसभा में विपक्ष के विधायक मौजूद नहीं थे। यानि पूरा खेल एक तरफा था। विपक्षी विधायकों वापस सदन में बुलाने का प्रयास सरकार की ओर से भी नहीं किया गया।
सीपी जोशी का अनुसरण:
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी राजस्थान के ही है। दो बार विधायक रहने के कारण ओम बिड़ला की रुचि राजस्थान विधानसभा की कार्यप्रणाली में भी होती है। चूंकि राजस्थान विधानसभा में भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हुए इसलिए अब लोकसभा में भी प्रश्नकाल को रद्द किया गया है। राजस्थान में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं करवाने के पीछे कोरोना संक्रमण के जो तर्क दिए गए वो ही तर्क अब लोकसभा अध्यक्ष दे रहे हैं। यानि ओम बिड़ला तो सीपी जोशी का अनुसरण कर रहे हैं।

 

 

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