7 सितम्बर से मंदिर में श्रद्धालुओं और दरगाह में जायरीन का प्रवेश शुरू हो सकेगा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सरकार की नई गाइड लाइन के अनुरूप पुष्कर स्थित विश्वविख्यात ब्रह्मा मंदिर और अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 7 सितम्बर से श्रद्धालुओं और जायरीन का प्रवेश शुरू हो जाएगा। चूंकि दोनों ही स्थान विश्वविख्यात हैं, इसलिए 4 सितम्बर को अजमेर के जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित और पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने दोनों स्थानों का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने यह देखा कि लोगों के प्रवेश पर फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना किस प्रकार से हो सकेगी। माना जा रहा है कि दरगाह में जियारत और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से लोग आएंगे। यानि बड़ी संख्या में लोगों बाहर से आवागमन शुरू होगा। कलेक्टर और एसपी चहाते हैं कि सरकार ने धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए जो गाइड लाइन जारी की है, उसका पूरी तरह पालन हो। अजमेर में कोरोना संक्रमण में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में बाहर से आने वाले लोगों की वजह से हालात न बिगड़े इसको लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
दरगाह कमेटी ने जताई सहमति:
ख्वाजा साहब की दरगाह में आंतरिक इंतजाम करने वाली दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अमीन पठान ने दरगाह में जायरीन के प्रवेश पर सहमति जताई है। पठान ने कहा है कि सरकार ने जो गाइड लाइन दी है, उसके अनुरूप जियारत की व्यवस्था की जाए। यानि दो गज की दूरी के अनुरूप जायरीन की कतार बनाई जाए। इसी प्रकार दरगाह के अंदर कई स्थानों पर सुरक्षित स्थान निर्धारित किए जाए, ताकि जायरीन की संख्या अधिक होने पर सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया जा सके। वहीं खादिमों की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह का कहना है कि प्रशासन और दरगाह कमेटी को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे अधिक से अधिक जायरीन जियारत कर सके। खादिम समुदाय दरगाह के अंदर इंतजामों को सफल बनाने में पूरा सहयोग करेगा। अंगाराशाह ने कहा कि गत बीस मार्च से दरगाह में जायरीन का प्रवेश बंद है। ऐसे में देशभर के जायरीन में जियारत को लेकर उत्सुकता है। उन्होंने कहा कि दरगाह के बंद रहने से हजारों परिवारों के सामने रोजी रोटी का सवाल भी उठ खड़ा हुआ है।







