- पाकिस्तान मायूस भारत की सेना का उत्साह बढ़ा।
- चीन से भारत आने वाली कंपनियों को जापान सब्सिडी देगा।
- सेना अध्यक्ष नरवणे लद्दाख सीमा पर पहुंचे।
- चीन के रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह से मिलने की इच्छा जताई।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – लद्दाख सीमा पर भारत के मुकाबले में खड़े चीन के लिए 4 सितम्बर का दिन बेहद बुरा रहा। ताइवान जैसे छोटे से देश ने चीन जैसे शक्तिशाली देश का सुखोई विमान मार गिराया। चीन जिस प्रकार लद्दाख सीमा पर भारत को धमका रहा है, उसी प्रकार चीन ताइवान के खिलाफ भी लगातार कार्यवाही कर रहा है। चीन की हरकतों को देखते हुए ही चार सितम्बर को ताइवान ने मिसाइल से चीन का सुखोई विमान मार दिया। विमान जलता हुआ ताइवान की सीमा में गिरा। विमान के पायलट की स्थिति गंभीर बनी हुई है। ताइवान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि चीन के लड़ाकू विमान ने हमारी हवाई सीमा में प्रवेश किया तो इसी तरह चीन के विमान मार गिराए जाएंगे। ताइवान की इस कार्यवाही से पाकिस्तान मायूस हो गया है। असल में चीन ने जब से लद्दाख सीमा पर घुसपैठ की है, तब से पाकिस्तान बहुत उछल कूद कर रहा था। पाकिस्तान को लग रहा था कि अब चीन भारत को सबक सिखाएगा। लेकिन 4 सितम्बर को जिस तरह ताइवान ने चीन का विमान मार गिराया उससे पाकिस्तान की उछलकूद बंद हो गई है। जब ताइवान जैसा छोटा से देश चीन का विमान गिरा सकता है तब भारत जैसे शक्तिशाली देश की कार्यवाही का अंदाजा लगा लेना चाहिए। भारत की थल सेना के अध्यक्ष एमएम नरवणे 4 सितम्बर को लद्दाख सीमा पर पहुंच गए हैं। नरवणे ने सीमा पर ही कहा कि पेंगॉन्ग झली की पहाडिय़ों पर देश की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। चूंकि चीन हरकतों से बाज नहीं आ रहा था, इसलिए भारत को सामरिक कदम उठाने पड़े हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि पेंगॉन्ग झील की नौ मेेंस लैंड पर चीनी सैनिकों ने कब्जा कर लिया था। अब भारत ने भी नौ मैंस लेंड पर चीन जैसी कार्यवाही की है। ऐसी स्थिति में सीमा पर हालात तनाव पूर्ण हो गए हैं। चीन को यह उम्मीद नहीं थी कि भारत सामरिक कदम उठाएगा। यही वजह रही कि चीन के रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने की इच्छा जताई है। दोनों रक्षा मंत्री इन दिनों रूस में मौजूद हैं। इस बीच चीन को जापान ने भी आर्थिक मोर्चे पर झटका दिया है। जापान की ओर से कहा गया है कि जो जापानी कंपनी चीन से कारोबार बंद कर भारत में अपनी फ़ैक्टरी स्थापित करेंगी उन्हें सब्सिडी दी जाएगी। यानि चीन से भारत आने वाले कंपनियों को आर्थिक नुकसान नहीं होगा।







