ख्वाजा साहब की दरगाह में न फूल न चादर पेश होगी। इसी तरह पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में प्रसाद और फूल भी नहीं चढ़ेंगे।

सरकार की गाइड लाइन के अनुरूप अजमेर में भी 7 सितम्बर से धार्मिक स्थल खुलेंगे।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 5 सितम्बर को अजमेर के जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित और पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप की उपस्थिति में 7 सितम्बर से धार्मिक स्थलों को खोलने को लेकर बैठक हुई। इस बैठक में अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़े प्रतिनिधियों और पुष्कर तीर्थ से जुड़े अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 7 सितम्बर से ख्वाजा साहब की दरगाह और पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर खुले इस पर बैठक में आम सहमति रही। लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि धार्मिक स्थलों पर सरकार द्वारा जारी गाइड का सख्ती के साथ पालन किया जाए। कलेक्टर राजपुरोहित और एसपी राष्ट्रदीप ने बताया कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए ख्वाजा साहब की दरगाह में फूल और चादर पेश नहीं किए जाएंगे। किसी भी जायरीन को अपने साथ फूल अथवा चादर ले जाने की इजाज़त नहीं होगी। इसी प्रकार पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में भी कोई भी श्रद्धालु अपने साथ प्रसाद अथवा फूल नहीं ले जा सकेगा। दोनों अधिकारियों ने कहा कि दरगाह के बाहर फूल और चादर की दुकानों को भी बंद रखा जाएगा। ख्वाजा साहब की दरगाह के अंदर देग में चावल तैयार करने को लेकर बाद में निर्णय लिया जाएगा। बैठक में दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अमीन पठान, दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन के पुत्र सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती, अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह आदि ने भाग लिया। बैठक के बाद अंगाराशाह ने कहा कि यह संतोष की बात है कि चार माह बाद ख्वाजा साहब की दरगाह में जायरीन का प्रवेश शुरू हो रहा है। चूंकि अभी कोरोना संक्रमण का अंदेशा बना हुआ है, इसलिए दरगाह के खादिम जिला प्रशासन को पूरा सहयोग करेंगे। अंगाराशाह ने बुजुर्ग खादिमों से भी अपील की है कि वे दरगाह आने में एहतियात बरते। अंगाराशाह ने कहा कि 7 सितम्बर से दरगाह में लगी सभी पाबंदियों को जा रहा है। अब खादिम समुदाय के लोग स्वैच्छा से दरगाह में इबादत कर सकते हैं। दरगाह दीवान के प्रतिनिधि सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बताया कि प्रशासन ने जो इंतजाम किए हैं उसमें सभी पक्ष सहयोग करेंगे। सबसे बड़ी बात ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत की है। चूंकि अब 7 सितम्बर से आम जायरीन जियारत कर सकता है, इसलिए यह सुकून की बात है।
चादर चढ़ाने की सूफी परंपरा:
ख्वाजा साहब की मजार पर फूल और चादर चढ़ाने की सूफी परंपरा है। जायरीन अपने सर पर फूल और चादर रखकर मजार शरीफ पर पहुंचता है। जायरीन अपनी मन्नत पूरी होने पर मजार पर चादर पेश करता है, जो जायरीन चादर पेश करने में असमर्थ रहते हैं वे फूलों से भरी टोकरी मजार शरीफ पर पेश करते हैं। यही वजह है कि प्रतिदिन हजारों चादर मजार शरीफ पर पेश की जाती है तथा कई हजार किलो फूल भी चढ़ाए जाते हैं। यही वजह है कि दरगाह के बाहर बड़ी संख्या में फूल और चादर की दुकानें लगी हुई है।

 

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